Hanuman || Full Movie 2026 | Kartoon Modern Movies
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2:25
हम
2:35
[हंसी]
2:53
या
3:11
वर्षों पहले की बात है मित्र। महान कौशल
3:16
राज्य पे रघुवंशी राजा दशरथ का शासन था।
3:20
महा तेजस्वी राजा दशरथ अपनी तीन रानियों
3:24
के साथ राजधानी अयोध्या में रहते थे। हर
3:28
सुख था उनके जीवन में संतान सुख के
3:32
अतिरिक्त।
3:34
विधाता ने उन्हें संतान सुख से वंचित कर
3:37
रखा था। इसके लिए उनके राजगुरु आचार्य
3:41
वशिष्ठ ने पुत्रष्टि यज्ञ की सलाह दी।
3:44
पुत्रेष्ठी यज्ञ के बाद राजा दशरथ को चार
3:50
बेटों का सुख मिला।
3:52
कौशल्या के राम, कैकई के भारत और सुमित्रा
3:58
के लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न हुए।
4:01
समय बीतने के साथ श्री राम का शौर्य और
4:06
वीरता
4:07
चारों ओर प्रसिद्ध हो गई। इतनी प्रसिद्ध
4:12
कि महर्षि विश्वामित्र ने भी अपने यज्ञ को
4:16
राक्षसी ताड़का के हाथों से बचाने के लिए
4:20
राजा दशरथ से श्री राम को ही मारा।
4:45
ओ
5:04
[चीखने की आवाज़][कराहने की आवाज़]
5:08
[चीखने की आवाज़]
5:16
इसके बाद श्री राम और लक्ष्मण को महर्षि
5:20
विश्वामित्र अपने साथ मिथिला ले गए।
5:25
जहां राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के
5:28
स्वयंवर का आयोजन किया था। स्वयंवर का
5:32
लक्ष्य था महादेव शिव के विराट धनुष सुनाभ
5:37
की प्रत्यंचा चढ़ाना।
5:39
बड़े-बड़े महारथी धनुष को हिला भी नहीं
5:43
पाए।
5:48
हिमपुर नरेश महाबली रोहित कुमार चुनाव की
5:52
प्रत्यंसा चढ़ाने के लिए उठे हैं।
6:29
महा पराक्रमी रोहित कुमार पराजित हुए।
6:37
बचपन में जिस धनुष को मेरी पुत्री सीता
6:40
खेल खेल में ही उठा लेती थी। क्या उसकी
6:43
प्रत्यंचा चढ़ाना भी किसी क्षत्रिय के वश
6:46
में नहीं रहा? क्या संसार में कोई नहीं जो
6:50
सुनाब की प्रत्यंचा चढ़ा सके?
7:21
मैं मिथिला नरेश जनक अत्यंत दुख के साथ
7:26
अपनी पुत्री सीता के स्वयंवर की समाप्ति
7:29
की घोषणा करता हूं क्योंकि धरती पर ऐसा
7:33
कोई पुरुष नहीं जो सीता के योग्य हो।
7:40
धरती वीर पुरुषों से रिक्त नहीं। जब तक
7:43
दशरथ पुत्र हैं तब तक तो नहीं।
7:47
ताड़का का वध किया है मेरे भैया राम ने।
8:32
ओम
8:49
ओम
9:20
बधाई हो दशरथ पुत्र श्री राम ने जनक सुता
9:25
देवी सीता का स्वयंवर लक्ष्य पूर्ण किया
9:29
[चीखने की आवाज़]
9:39
राम राम सीता विवाह के साथ तो जैसे
9:42
अयोध्या में सौभाग्य की वर्षा ही हो गई।
9:46
लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न तीनों का विवाह
9:50
सीता की बहनों क्रमशः उर्मिला, मांडवी और
9:54
श्रुत कीर्ति से हुआ। अयोध्या में इतनी
9:58
प्रसन्नता कभी भी नहीं थी। पूरे नगर में
10:03
उत्सव था। सब कुछ व्यवस्थित था। प्रजा राम
10:08
को अयोध्या के होने वाले राजा के रूप में
10:11
देखने लगी। राजा दशरथ भी वृद्ध हो चले थे।
10:17
कैकई मैं सोचता हूं राम को उत्तराधिकारी
10:22
बनाकर राजकाज से मुक्ति पा लूं।
10:26
अति उत्तम विचार है महाराज।
10:29
यही उपयुक्त समय भी है कि आप अपना
10:32
उत्तराधिकारी घोषित करें और और राम इसके
10:36
लिए सबसे योग्य है।
10:37
लेकिन भरत और शत्रुघ्न तो ननिहाल गए हैं।
10:40
तो क्या हुआ? राम उनका बड़ा भाई है। फिर
10:44
राम राम तो सर्वगुण संपन्न है।
10:48
मैं आज ही घोषणा करता हूं।
10:51
सुनो सुनो सुनो।
10:54
समस्त अयोध्या वासियों को यह शुभ समाचार
10:58
है कि महाराजा
11:02
दशरथ ने युवराज धर्म के राजा अभिषेक का
11:07
निर्णय लिया है।
11:19
अयोध्या की होने वाली महारानी को मेरा
11:24
अभिवादन।
11:29
क्या बात है महारानी?
11:32
मुझसे कोई भूल हुई।
11:35
राजपुरुषों का क्या भरोसा?
11:38
कल कोई और मुझसे सुंदर मिल गई तो वो
11:41
महारानी बन जाएगी।
11:43
[हंसी]
11:45
ऐसा विचार क्यों आया सी?
11:50
मैं स्त्रियों का यह दुख समझता हूं सीते।
11:53
मैंने स्वयं अपनी मां को इस चक्र में फंसे
11:56
हुए देखा है। सौद का डंक हर नारी के लिए
12:00
विश ही होता है। तुम नहीं जानती सीता।
12:04
मैंने बहुत पहले ही यह व्रत ले लिया था कि
12:07
मेरी एक ही पत्नी होगी।
12:10
संसार की कोई भी नारी मेरा यह व्रत भंग
12:14
नहीं कर सकती। मेरे जीवन में एक ही स्त्री
12:16
है और वो हो तुम।
12:21
स्वामी मैं भी प्रण करती हूं कि सुख हो या
12:26
दुख सदैव आपके साथ ही रहूंगी।
12:33
अब तो अभिवादन स्वीकार करो महारानी।
12:40
परंतु जीवन इतना ही सरल होता तो वह जीवन
12:44
चक्र ना कहलाता। सौभाग्य बीत चुका था और
12:49
दुर्भाग्य ने अयोध्या के राजभवनों में
12:53
करवट लेनी आरंभ कर दी।
12:55
ये आया सप्तम और ये जीता मैंने लक्ष्य। तू
13:00
पुनः हार गई। [हंसी]
13:04
हंस लीजिए रानी। जी भर के हंस लीजिए। पता
13:09
नहीं आगे भविष्य क्या हो।
13:12
क्या बोली तू?
13:16
प्राणों का अभय हो तो बोलो रानी। कल मेरे
13:22
राम का राज्य अभिषेक है। इस अवसर पर तो
13:25
सबका अभय है। बोल निर्भय होकर बोल।
13:31
हम यह राज्य अभिषेक ही तो आपका दुर्भाग्य
13:36
लाएगा।
13:37
क्या बकवास करती है?
13:45
मैं तो सदा आपका भला ही चाहती हूं रानी।
13:49
यहां आपके और भरत के अतिरिक्त मेरा है ही
13:52
कौन?
13:55
आपके विरुद्ध महल में षड्यंत्र रचा जा रहा
13:58
है। षड्यंत्र? कैसा षड्यंत्र? राम के राजा
14:03
बनते ही कौशल्या और सुमित्रा आपसे गिनगिन
14:08
कर बदले लेंगी। वो दोनों महाराज के आपके
14:12
प्रति प्रेम से जलती हैं।
14:19
नहीं नहीं मेरा राम ऐसा कभी नहीं होने
14:22
देगा। आप राम राम भजती रहना। और वह राजा
14:26
बनते ही अपनी मां के कहने पर आपको और भरत
14:30
बेटे को राज्य से बाहर निकाल फेंकेगा।
14:34
महाराज भी तब कुछ नहीं कर पाएंगे। हम
14:42
आपको शमरासुर युद्ध का स्मरण है ना?
14:45
हम महाराज का जीवन बचाया था आपने और
14:49
उन्होंने आपसे दो वरदान मांगने के लिए कहा
14:52
था।
14:55
हम जो आपने उस समय नहीं मांगी
15:00
किंतु अब मांगने की घड़ी है। शीघ्र बोल
15:03
करना क्या है?
15:19
ऐसा ही होगा।
15:22
मेरे विरुद्ध षड्यंत्र
15:24
वैसे 14 वर्षीय क्यों मृत्यु क्यों नहीं
15:29
रानी
15:31
राम लोकप्रिय है प्रजा विद्रोह कर सकती है
15:36
14 वर्ष में उसका यौवन बीत चुका होगा
15:40
सब उसे भूल भी चुके होंगे और फिर जंगलों
15:45
में तो राक्षस भी हैं। क्या पता राम का
15:50
अंत उन्हीं के हाथों हो जाए।
16:04
रानी कैकई को भवन में चली जाती है और राजा
16:09
दशरथ को विवश कर देती है कि राम को वनवास
16:13
हो और भरत राजा बने।
16:21
पिता के वचनों की रक्षा करनी है। मां।
16:25
मुझे अनुमति दे।
16:26
मैं देखता हूं कौन आपके अधिकार छीनता है।
16:30
मैं भरत का वध कर दूंगा। पिता सम्मुख आए
16:33
तो उनका भी मैं
16:34
शांत रहो लक्ष्मण।
16:37
अधर्म और पाप से युक्त राज्य का मैं लोभ
16:40
नहीं। मेरी यात्रा की व्यवस्था करो।
16:45
ये मेरी आज्ञा है।
16:47
मैं भी बन जाऊंगी आपके साथ।
16:53
मैंने हर स्थिति में आपके साथ रहने की
16:56
प्रतिज्ञा की है। [संगीत]
16:57
किंतु सी
16:58
यदि मेरी प्रतिज्ञा टूटी तो मृत्यु कारक
17:01
होगी।
17:08
हम्म
17:27
मेरे पुत्र
17:30
दुर्भाग्य है मेरा दुर्भाग्य है मुझे
17:34
क्षमा कर दो पुत्र मुझे क्षमा कर दो
17:39
ऐसा मत कहिए पिताजी
17:43
14 वर्ष तो पलक छपकते ही बीत जाएंगे
17:47
आप मुझे मल वन प्रस्थान की अनुमति दे।
17:56
नहीं नहीं तुम समर्थ हो। राम तुम तलवार के
18:01
बल पे कौशल पे शासन करो पुत्र।
18:04
इ्वाकु वंश के इतिहास में ऐसा कभी नहीं
18:07
हुआ। पिताजी
18:09
राम के जीवन में तो यह संभव नहीं।
18:13
चलता हूं।
18:17
राम
18:20
मत जाओ राम अयोध्या तुम्हारी है तोड़ दो
18:26
मेरा वचन
18:28
राम
18:31
मेरे पुत्र मत जाओ मत जाओ राम मत जाओ
19:12
भैया भैया
19:20
भैया मैं भी चलूंगा आपके साथ मार्ग में
19:23
आपकी सेवा कौन करेगा भैया?
19:35
ओम
19:57
आप जाइए स्वामी आपका कर्तव्य सर्वोपरि है।
20:02
मैं आपकी राह देखूंगी।
20:18
श्री राम, लक्ष्मण और देवी सीता का लक्ष्य
20:21
चित्रकूट था।
20:23
मांझी केवट ने उन्हें गंगा पार कराई।
20:27
ऐसा भक्त कि तीनों के पैर धोए नौका में
20:32
चढ़ाने से पहले
20:41
चित्रकूट के मनोरम वातावरण में तीनों
20:45
अयोध्या का दुख भूल गए।
20:50
लेकिन दुर्भाग्य अभी भी अयोध्या में ही
20:53
मंडरा रहा था।
20:56
महाराज दशरथ ने पुत्र वियोग में प्राण
20:59
त्याग दिए।
21:06
घटनाएं तीव्र गति से घटती गई। पुण्यत्मा
21:10
भरत ने अपनी माता कैकई के षड्यंत्र को
21:13
स्वीकार नहीं किया। वो श्री राम को
21:16
अयोध्या वापस लाने के लिए चित्रकूट
21:19
पहुंचा। धर्मात्मा राम अपनी बात पर दृढ़
21:22
रहे तो भरत भी कम नहीं निकला।
21:27
वो श्री राम की चरण पादुका ही अपने साथ ले
21:30
लिया।
21:32
अयोध्या का राज सिंहासन
21:35
श्री राम के ही चरणों के नीचे था।
21:43
दुष्टों का नाश करते हुए और जनसाधारण को
21:47
प्रगति का रास्ता दिखाते हुए तीनों द
21:51
वर्षों तक दंडक वन में इधरउधर घूमते रहे।
21:56
अंततः वे महान अगस्त्य मुनि से मिले।
22:00
जिन्होंने दोनों भाइयों को दिव्य अस्त्र
22:03
दिए। वैष्णव धनुष और जिनके बाण कभी समाप्त
22:08
ना हो ऐसे तो
22:10
अब राम महाशक्तिशाली थे। इसके बाद तीनों
22:16
का अगला पड़ाव था पंचवटी।
22:19
वनवास के 13 वर्ष पूरे हो चले थे। देवी
22:24
सीता और लक्ष्मण तो अयोध्या की स्मृति में
22:27
थे।
22:29
किंतु राम को संभवत दैव की क्रूर क्रीड़ा
22:33
का आभास था।
22:39
कौन हो तुम रूपवान मनुष्य?
22:43
और इस घने जंगल में क्या कर रहे हो?
22:47
मैं दशरथ पुत्र राम हूं देवी। लेकिन तुम
22:52
मैं
22:55
मैं इस वन की रानी हूं। शूरपुरा खान
23:01
आप यहां की रानी है तो आइए मेरी कुटिया
23:05
में पधारिए।
23:06
नहीं तुम चलो मेरे साथ संसार भर के सुख
23:12
तुम्हारी प्रतीक्षा में है।
23:15
मैं नहीं जा सकता देवी। मैं वचनबद्ध हूं।
23:19
तुम जाओ।
23:22
मेरे जैसी सुंदरी त्रिलोक में नहीं।
23:26
मेरा मेरा प्रणय स्वीकार करो। मैं तुम्हें
23:30
यहां का राजा बना दूंगी।
23:31
तुम स्त्री हो देवी। मैं तुम्हें हानि
23:34
नहीं पहुंचाना चाहता। चली जाओ।
23:40
तू मूर्ख है राम। अब अब
23:45
तू मेरा दास बनेगा।
23:48
[हंसी]
23:53
आहा दोद सुंदर मानव
23:59
क्या हुआ स्वामी
24:01
अच्छा
24:03
तो इसी के कारण तुम मेरा तिरस्कार कर रहे
24:06
हो राम अब तो मैं पहले इसको मारूंगी
24:13
लक्ष्मण
24:15
हम बच्चों और स्त्रियों को नहीं मारते
24:17
इसलिए
24:22
जा भाग जा। अब तू किसी को अपने रूप का लोभ
24:26
नहीं दे पाएगी।
24:36
मैं राक्षस राज रावण की बहन हूं। दुष्टों
24:38
तुमको इसको नोट अवश्य मिलेगा। अवश्य
24:41
मिलेगा।
24:54
हम हम
25:13
हम
25:15
विश्व विजेता हैं। हम
25:20
शासक हैं।
25:22
हम
25:24
राक्षस हैं।
25:28
हम
25:30
राक्षस हैं।
25:32
राक्षस है।
25:41
महासेनापति प्रहस्त
25:46
देवों ने विद्रोह किया है राक्षसराज
25:49
उन्होंने राक्षस प्रतिनिधि की हत्या कर दी
25:52
है।
25:52
नष्ट कर दो देवों को।
25:55
रावण के विरुद्ध जो सर उठे
25:58
काट डालो।
26:01
मार दो। बच्चा हो या स्त्री
26:04
एक-एक देव को मार डालो।
26:09
हम [चीखने की आवाज़]
26:10
राक्षस हैं।
26:16
बैठे रहो विभीषण।
26:19
मुझे मालूम है। तुम क्या कहना चाहते हो?
26:23
परंतु राक्षस राज धर्म
26:26
मुझे धर्म का पाठ मत पढ़ा। मूर्ख
26:30
सुना नहीं तूने।
26:33
बैठा रहे।
26:40
महामहिम राक्षस राज की जय हो। राजपुत्र
26:43
शिर्पनखा उपस्थित होने की आज्ञा चाहती है।
26:47
शूरप
26:49
वो यहां क्या कर रही है?
26:52
भेजो उसे।
26:59
नाटक मत कर सूटनाखा।
27:01
बोल क्या हुआ? क्या चाहिए?
27:33
आज की सभा भंग की जाती है।
27:42
इतना क्या सोच रहा था?
27:45
तेरी बहन का अपमान हुआ है। जा और नाश कर
27:49
दे उन मानवों का।
27:56
क्या पता दे
28:01
[हंसी]
28:04
मानो स्त्री सीता
28:08
श्याम
28:11
बस
28:13
सदा स्त्रियों के बारे में सोच
28:18
मरवाएगा
28:20
मरवाएगा
28:23
मुझे भी ये देवों का ही जल लगता है। मुझे
28:26
भी मुझे भी मुझे भी मुझे भी
28:32
यदि ये देवों का छल है
28:36
तो मैं भी माया से ही काम लूंगा।
28:47
सीता
29:07
[संगीत]
29:14
कितना सुंदर है ये मृग।
29:19
सचमुच बहुत सुंदर है।
29:35
सीता
29:38
धीरे बोलिए भाग जाएगा।
29:41
देवों का षड्यंत्र तो नहीं लग रहा।
29:45
लेकिन
29:48
सीता
29:51
सीता तो अद्भुत है
29:54
और बहुत सुंदर है
29:59
स्वामी पकड़िए ना इसे यहां रहेगा तो मुझे
30:04
बहुत अच्छा लगेगा
30:06
पकड़िए ना इसे इसे मैं अयोध्या ले जाऊंगी
30:11
कितना अद्भुत है ये लगता है जैसे कैसे
30:14
स्वर्ण का बना है?
30:17
कहीं कोई माया तो नहीं।
30:22
आहा
30:24
अद्भुत हिरन है भाभी।
30:26
जाइए ना स्वामी मेरे लिए।
30:32
ठीक है सी। लक्ष्मण। मैं इसे पकड़ता हूं।
30:37
यदि दूर गया तो यहां का ध्यान रखना।
30:42
मामा मारे सुनो
31:07
हम्म
31:48
सी [चीखने की आवाज़]
31:53
ये तो तुम्हारे भैया का स्वर लगता है।
31:56
लगता है वो वो संकट में है।
31:59
नहीं हो सकता। अवश्य ही कोई माया है। भाभी
32:03
आप अंदर चलिए।
32:08
अरे तुम्हारे भैया संकट में तुम्हें पुकार
32:11
रहे हैं। और तुमको माया सूझ रही है। जाओ
32:15
देखो जाकर।
32:17
नहीं भाभी भैया उस संकट में असंभव।
32:22
अरे धिक्कार है तुम्हें लक्ष्मण। क्या
32:26
माता कैकई की भांति तुम्हारा भी माथा गिर
32:29
गया। अब क्या तुम्हारी भी अयोध्या पर
32:32
दृष्टि है?
32:34
तुम जाना अकेले अयोध्या।
32:37
ऐसा ना कहिए भाभी।
32:42
सीता
32:47
मैं मैं जाता हूं लेकिन आपको सुरक्षित
32:50
करके।
32:52
भाभी अब यह कुटी मंत्रबद्ध है। कुछ भी हो
32:56
जाए आप इस रेखा से बाहर मत निकलिएगा।
33:01
क्यों स्वर्ण की लाज का?
33:04
भिक्षाम देही
33:09
सुखी रहो पुत्री। अकेली हो?
33:14
नहीं ऋषिवर मेरे पति और देवर आने ही वाले
33:17
हैं।
33:20
क्या साधु को भिक्षा मिलेगी पुत्री?
33:23
अवश्य ऋषिवर।
33:36
इधर आइए ऋषिवर। दान ग्रहण कीजिए।
33:39
मैं त्यागी हूं पुत्री।
33:42
किसी भवन की छाया भी मेरे लिए वर्जित है।
33:46
तुम
33:48
यहां आकर भिक्षा दो।
33:50
क्षमा करें महामुनि मैं यह नहीं कर सकती।
33:54
मैं ये रेखा नहीं लांग सकती।
33:56
अपमान है। घोर अपमान।
34:00
मैं तुम्हारे दान का भूखा नहीं। यदि देना
34:03
है तो इधर आ। नहीं तो मैं जाता हूं। पर
34:07
स्मृति रहे। द्वार पर आए साधु का निरादर
34:12
ईश्वर भी क्षमा नहीं करता। अलख
34:15
[चीखने की आवाज़]
34:16
निरंजन
34:17
रुकिए ऋषिवर
34:28
धन्य हो पुत्री। ईश्वर तुम्हें संसार की
34:32
स्वामिनी बनाए।
34:37
हा [हंसी]
34:38
ये क्या है रे दूत?
34:42
अति सुंदर
34:44
तुम तो सच में रूपवती हो देवी।
34:48
मेरा हाथ छोड़ वंचक नहीं तो मारा जाएगा।
34:51
क्रोध में और अधिक सुंदर हो जाते हो प्रिय
34:55
सीता।
34:57
कौन हो तुम? मेरा नाम कैसे पता?
35:00
मैं हूं रावण।
35:03
लंकाधिपति रावण दशानंद रावण। उस शोर लखा
35:08
का भाई जिसकी नाक काटी है तुम लोगों ने
35:12
उसका प्रतिशोध लिया है मैंने अब तू मेरी
35:16
रानी बनेगी महाभागे
35:18
स्वामी
35:20
लक्ष्मण
35:21
रक्षा करो
35:22
दुखी मत हो प्राणप्रिय मैं तुझे सम्मान से
35:25
रखूंगा
35:27
तू मेरी पटरानी बनेगी
35:31
सावधान रावण तूने मेरा हरण नहीं किया अपने
35:36
काल को बुलाया है। तेरा सर्वनाश होगा।
35:41
[हंसी]
35:43
चलो।
35:45
[हंसी]
35:53
दुष्ट रावण देवी सीता का हरण कर दक्षिण
35:56
दिशा की ओर मुड़ गया। परंतु आकाश मार्ग
36:00
में भी उसके सामने एक महान रुकावट थी।
36:04
कृदराज जटायु
36:08
कहां हो
36:10
रक्षा करो इधर आशंकित राम और लक्ष्मण
36:14
पंचवटी पहुंचे तो वहां देवी सीता नहीं थी
36:19
घबरा कर दोनों उन्हें ढूंढते हैं परंतु अब
36:22
वो कहां मिलने वाली थी
36:25
भाभी
36:32
तुझे कोई बचाने नहीं आएगा सीता तू अब मेरी
36:37
है
36:44
[हंसी]
36:49
[कराहने की आवाज़]
36:50
कहर क्या आदत आई
36:53
अबला का हरण करने में कहां की वीरता
36:56
मेरा सामना कर कौन है मूर्ख
37:00
काल के रास्ते में आता है
37:03
मृत्यु का भय नहीं है तुझे। मैं गिद्धों
37:06
का राजा जटायु हूं। छोड़ दे इसे दुष्ट। या
37:12
[कराहने की आवाज़][चीखने की आवाज़]
37:28
ये
37:34
[चीखने की आवाज़]
37:35
[कराहने की आवाज़]
37:45
[चीखने की आवाज़]
37:46
[हंसी]
37:49
किसी से
37:53
कहां हो तुम?
37:58
किसी ने देखी है मेरी सीता।
38:02
इधर देवी सीता अपने कुछ आभूषण ऋषक पर्वत
38:07
की चोटी पर गिरा देती है। जो वानर राज
38:10
सुग्रीव को मिलते हैं।
38:13
उधर दोनों भाई मार्ग में गंभीर रूप से
38:16
घायल जटायु [संगीत] से मिलते हैं।
38:20
दक्षिण की ओर चलते-चलते श्री राम और
38:23
लक्ष्मण से कब नाम का एक राक्षस टकराता है
38:27
जो कि वास्तव में एक शापित देव पुरुष था।
38:31
कबंद द्वारा बताई राह पर चलते हुए वे मतंग
38:34
ऋषि के आश्रम में पहुंचते हैं जहां शबरी
38:38
उनकी प्रतीक्षा कर रही थी।
38:40
अद्भुत नारी थी वो पीली।
38:44
स्वयं चखकर मीठे बेर उसने दोनों भाइयों को
38:48
खिलाए।
38:55
इसके बाद दोनों किष्किंधा पहुंचे।
38:59
वानरों की नगरी किष्किंदा।
39:03
इसके पश्चात तो तुम जानते ही हो। अब हम
39:06
लोग मित्र हैं।
39:08
किंतु बाली से त्रस्त सुग्रीव हमारी कितनी
39:13
सहायता कर सकते हैं?
39:14
आर्य यदि बाली से मुक्ति मिलती है तो
39:18
सुग्रीव कुछ भी करने को तैयार हो जाएंगे।
39:21
और यदि श्री राम की सहायता मिलेगी तो
39:24
सुग्रीव निश्चित ही विजय होंगे।
39:26
बाली ने अन्याय किया है। कोई छोटे भाई के
39:29
साथ ऐसा नहीं करता।
39:31
किंतु मित्र तुम सुग्रीव के साथ क्यों हो?
39:35
सुग्रीव प्रजा हित सोचते हैं और बाली
39:39
निरंकुश है।
39:41
वानर जाति का हित सुग्रीव का शासन ही है।
39:46
हम
39:48
कल का दिन महत्वपूर्ण है। कल सुग्रीव बाली
39:51
को युद्ध के लिए ललकारेंगे।
39:54
चलो भैया प्रतीक्षा कर रहे होंगे।
40:19
बाली महाबलशाली है श्री राम। वो विशाल
40:22
पर्वत खंडों को घूसे से चूरचूर कर सकता
40:25
है। बड़े-बड़े पेड़ उखाड़ देता है। आप
40:28
कैसे मारेंगे उसे?
40:30
आप भैया की क्षमता पे संदेह कर रहे हैं?
40:33
नहीं। नहीं, मैं तो बस पूछ रहा था।
40:57
देखा मित्र
41:00
मैं अभी जाकर बाली को लौटता हूं।
41:11
बाली
41:13
[कराहने की आवाज़]
41:14
ओ बोले
41:17
बाहर से है तो मेरे सामने आ दुष्ट बाहर
41:21
निकल
41:38
[कराहने की आवाज़]
41:40
हो
42:02
ध्यान से बंधु बहुत दुख रहा है।
42:08
यदि बाली को नहीं मारना था तो ये योजना
42:11
क्यों बनाई? मेरे वध के लिए कैसे मित्र
42:15
हैं आप श्री राम?
42:17
मेरी कठिनाई भी तो समझो कपीराज। यदि बाली
42:20
के भ्रम में बाण आपको लग जाता तो अनर्थ
42:23
होता था।
42:24
हां महाराज दूर से आप दोनों के भीषण युद्ध
42:27
में कौन बाली है और कौन आप यह भेद करना
42:31
असंभव ही था।
42:32
एक काम कीजिए कविराज आप दोबारा जाइए। इस
42:35
बार योजना दूसरी है।
42:37
नहीं नहीं दादा आपकी योजना मेरे कितने काम
42:42
की है? ये मैं भली-भांति जान गया हूं।
42:48
[हंसी]
42:49
इस बार चूक नहीं होगी कपीराज। देखिए इस
42:53
बार आप यह धारण किए होंगे।
43:12
बोले
43:15
ओ बोले
43:23
दोस्त बाहर निकल
43:52
[कराहने की आवाज़]
43:54
ऊ
43:58
[कराहने की आवाज़]
44:11
ओ
44:31
उ
44:54
ऊ आ हो
45:26
[संगीत]
45:58
वानर राज सुग्रीव की
46:01
जय हो।
46:02
बालीपुत्र अंगद की
46:05
जय हो।
46:07
जय हो जय हो जय हो जय हो जय हो जय हो
46:14
[हौसला बढ़ाने की आवाज़]
46:17
बंधुओं
46:19
जीवन एक बार मिलता है। हमें इसी जीवन में
46:24
सिद्ध करना होता है कि हम उसके योग्य हैं।
46:27
बाली मेरा भाई था। किंतु धर्म और कर्तव्य
46:31
से ऊपर कुछ भी नहीं।
46:34
मैं
46:36
वानर राज सुग्रीव हूं।
46:39
क्या वानर वंश मेरे साथ है?
46:52
जय
47:15
तो बाली मारा गया।
47:17
एक और विशेष बात महामहिम।
47:20
एक बड़ी वानर सेना इन दिनों किष्किंधा में
47:24
एकत्र है।
47:25
क्या बड़ी बात है?
47:27
सुग्रीव राजा बना है तो शक्ति प्रदर्शन कर
47:31
रहा होगा।
47:33
युद्धपति सुसेन आप अपने दल के साथ पूर्व
47:36
दिशा में जाएं
47:39
और आप पश्चिम में जाएं। केसरी आप उत्तर
47:45
में जाएंगे। मैं आपको एक महीने का समय
47:48
देता हूं। महीने भर के भीतर आपको लौट कर
47:51
आना है यह निश्चित करके कि देवी सीता
47:54
[संगीत]
47:55
उस दिशा में है या नहीं।
47:58
हनुमान,
48:00
अंगद, जामवंत और नलनी
48:04
आप मेरे सर्वश्रेष्ठ वीर हैं। दक्षिण दिशा
48:08
में देवी के मिलने की सर्वाधिक संभावना
48:10
है। अतः अंगद के नेतृत्व में आपका दल
48:14
दक्षिण जाएगा। स्मृति रखें। एक महीना।
48:19
हम विश्वास दिलाते हैं महाराज। यदि असफल
48:22
हुए तो जीवित नहीं लौटेंगे। किंतु यदि
48:25
देवी मिली तो हमें पहचानेंगी कैसे?
48:29
यदि सीता मिले
48:32
तो यह अंगूठी दिखाना।
48:35
वे आपको मित्र ही समझेंगे।
48:55
खा लो पुत्री अन्न त्यागने से कुछ नहीं
48:58
होगा।
48:59
कैसे खा लूं माता? क्या पता मेरे राम भी
49:04
भूखे हो।
49:11
भैया तीन महीने हो गए। दक्षिण वाला दल अभी
49:14
तक नहीं लौटा।
49:20
अभी मैंने आशा नहीं छोड़ी है लक्ष्मण।
49:23
देर होने का अर्थ है कि उन लोगों का साहस
49:26
अभी जीता है।
49:41
[कराहने की आवाज़][चीखने की आवाज़]
49:55
मैं मैं
49:57
अब वृद्ध हो चला हूं।
50:04
ठहरिए महानुभाव।
50:06
आप गिद्ध हैं। अवश्य गिद्धराज जटायु को
50:09
जानते होंगे। हां जटायु
50:13
वो तो मेरा छोटा भाई है। तुम तुम कैसे
50:17
जानते हो उसे?
50:27
मेरे भाई जटायु
50:30
जिस रावण ने तुम्हारी हत्या की उसका नाश
50:34
होगा। नाश होगा उसका। सुनो बंधुओं, मैंने
50:40
देखा था रावण को किसी नारी का हरण करके
50:44
लंका की ओर जा रहा था। अवश्य ही वह देवी
50:47
सीता होंगी।
50:48
लंका?
50:49
हां लंका। वही है उसकी राजधानी।
50:54
इस समुद्र के बीच में है वो दुर्गम द्वीप।
50:58
परंतु वहां तक पहुंचने का मार्ग देव
51:01
संपाती। यहां से दूर महेंद्र पर्वत के तट
51:04
से लंका की दूरी मात्र 100 योजन रह जाती
51:07
है। वहां समुद्र उथला भी है। क्योंकि मैना
51:11
पर्वत श्रृंखला है उसके अंदर। वहां से तुम
51:14
लोग लंका पहुंच सकते हो।
51:17
धन्यवाद गिद्धिराज।
51:19
हम उपकृत हुए।
51:25
यहां से लंका
51:28
100 योजन दूर है। मैं 60 योजन तक तो बिना
51:31
थके जा सकता हूं।
51:34
बूढ़ा हूं। फिर भी 80 योजन तो जा ही सकता
51:38
हूं।
51:38
मैं 100 योजन तक तो जा सकता हूं।
51:42
लेकिन
51:44
लौटने में गड़बड़ हो सकती है।
51:49
तो फिर क्या करें?
51:56
मैं ही जाता हूं। रुकिए युवराज। आप दल के
52:01
नेता हैं। मैं जानता हूं कौन जाएगा। लेकिन
52:07
उसे जगाना होगा।
52:10
वानर रत्न हनुमान
52:15
मौन क्यों बैठे हो?
52:21
अवश्य ही शक्ति तौल रहेगे अपनी।
52:26
उठो महावीर उठो
52:29
संसार को दिखा दो कि तुम कितने समर्थ हो।
52:34
महाबली श्री राम का विश्वास तुम्हारे ही
52:38
कंधों पर टिका है।
52:48
[संगीत]
52:54
साथियों चिंता ना करो। मैं श्री राम का
52:57
काम अवश्य पूरा करूंगा।
53:46
ये सुरता का प्रतिबंधित क्षेत्र है। कौन
53:51
है रे तू दुस्साहसी?
53:53
तुझे मेरे मुख में आना होगा।
54:28
नाग माता मैं आपके मुंह में जा चुका हूं।
54:32
आपका मंत पूरा हुआ।
54:35
अब मुझे जाने दे।
54:36
जाओ मेरा आशीर्वाद है तुम्हें।
55:01
ओ [कराहने की आवाज़]
55:03
[चीखने की आवाज़]
55:28
श्री राम [संगीत]
55:37
ओ तो ये है रावण की सोने की लंका
55:42
आनंद आएगा
56:55
वाह भैया हनुमान की ये कला तो अब तक छिपी
56:59
ही थी।
56:59
अरे मैं तो इसे बचपन से देख रहा हूं। इतना
57:03
चंचल कि सूर्य को फल समझकर खाने उड़ा था।
57:07
इसकी उच्च शंखलताओं से तंग आकर ही तो इसको
57:11
श्राप मिला था कि जब तक कोई इसे प्रेरित
57:15
नहीं करेगा यह अपनी शक्तियों को भूला
57:18
रहेगा। सो आज मैंने प्रेरित कर दिया।
57:27
कहां होगी देवी सीता? कहां होगी?
57:48
कहां होंगे?
57:52
ये क्या
57:56
तू मानती क्यों नहीं मेरा प्रस्ताव? हृदय
58:00
मंजरी।
58:02
उस कंगले राम के पीछे जीवन क्यों नष्ट कर
58:06
रही हो? वल्लभे मैं तुझे सुख से रखूंगा।
58:10
मान जा सुलोचनी मान जा।
58:14
[नाक से की जाने वाली आवाज़]
58:17
अरे दुष्ट कितनी बार तुझे ना बोलूं जा
58:22
अपने दिन गिन। मेरे राम बस आते ही होंगे।
58:30
गिन तो अब तू गिन। मैंने तुझे एक वर्ष का
58:35
समय दिया था और अब बस
58:38
दो माह ही बचे हैं। यदि तू नहीं मानी
58:43
तो मेरी रसोई
58:45
[हंसी]
58:47
तेरी प्रतीक्षा में है।
58:57
राम
58:59
मेरे राम।
59:01
कहां हो गई?
59:04
क्या जीवन से हार मान लो?
59:19
[अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]
59:27
[अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]
59:51
प्रणाम देवी सीता
59:53
ये ये तो मेरे मेरे स्वामी की अंगूठी है।
59:58
हां माता स्वयं श्री राम ने मुझे दी है।
1:00:02
मैं हूं उनका अनुचर वानर हनुमान।
1:00:06
कैसे हैं स्वामी राम? देवर लक्ष्मण कैसे
1:00:10
हैं? मेरे बिना क्या हाल हुआ होगा उनका?
1:00:14
कौन उनके भोजन आदि का ध्यान रखता होगा?
1:00:17
देवी अब आपका समाचार सुनकर निश्चय ही
1:00:21
अच्छे हो जाएंगे।
1:00:22
कपीवर स्वामी की सूचना देकर आज मेरा हृदय
1:00:27
प्रसन्न कर दिया तुमने।
1:00:30
श्री राम और लक्ष्मण के बाद तुम ही अब
1:00:33
मुझे सर्वाधिक प्रिय रहोगे। स्वामी से
1:00:36
कहना शीघ्रता करें। रावण मुझे दो महीने
1:00:40
बाद मार देगा।
1:00:43
यदि ऐसा है माता तो मैं आपको अपनी पीठ पर
1:00:46
बैठाकर यहां से ले चलता हूं।
1:01:10
तुम जाओ और शीघ्र स्वामी को लेकर आओ।
1:01:14
आप मेरे साथ चलिए ना माता। मैं आपके पुत्र
1:01:18
जैसा ही तो हूं।
1:01:19
नहीं पुत्र मेरे सम्मान के लिए श्री राम
1:01:23
को स्वयं ही आना होगा।
1:01:25
किंतु
1:01:25
और इस दुष्ट रावण को भी तो पाठ पढ़ाना है।
1:01:33
ये लो मेरा स्मृति चिन्ह स्वामी को देना
1:01:38
वो समझ जाएंगे।
1:01:41
ठीक है माता।
1:01:49
माता मैंने कल से कुछ नहीं खाया। यदि आपकी
1:01:53
आज्ञा हो तो दो चार फल खा लूं।
1:01:58
खा लो
1:02:11
राक्षस राज एक वानर उत्पात मचा रहा है।
1:02:15
उसने अशोक वाटिका ध्वस्त कर दी है।
1:02:17
जाओ उस दुष्ट को जीवित लाना मेरे सामने।
1:02:22
कौन है रे तू? क्यों आया लंका में? मैं
1:02:26
किष्किंधा के राजा सुग्रीव का सचिव हनुमान
1:02:30
आपके पास दशरथ पुत्र श्री राम का संदेश
1:02:35
लाया हूं। आपने उनकी पत्नी सीता को बलपूक
1:02:39
लंका में बंदी बनाकर रखा हुआ है। मेरा
1:02:42
निवेदन है कि आप सीता माता को ससम्मान
1:02:46
लौटा दें। अन्यथा आपको युद्ध के अनर्थकारी
1:02:49
परिणाम भुगतने होंगे। तेरा यह साहस
1:02:54
रावण को धमकाता है। लंकाधिपति
1:02:58
रावण को धमकाता है।
1:03:01
प्रहस
1:03:03
वध कर दो इस तुच्छ वानर का।
1:03:06
महाराज दूत अवध्य होता है। इसके अपराधों
1:03:10
का आप कोई अन्य दंड दे सकते हैं। परंतु
1:03:14
प्राणदंड आचार विरुद्ध होगा।
1:03:17
हम
1:03:19
वानर को उसकी पूंछ
1:03:22
सर्वाधिक प्रिय होती है।
1:03:25
इस दुष्ट की पूंछ में आग लगाकर इसे नगर
1:03:28
में घुमाओ।
1:03:32
कौतुक रहेगा।
1:03:51
राम श्री राम
1:03:54
श्री राम जय श्री राम
1:03:59
राम
1:04:00
श्री राम
1:04:02
श्री राम जय श्री राम
1:04:07
राम
1:04:09
राम
1:04:41
क्या हुआ मंत्रीवर?
1:04:43
मिल गई सीता माता।
1:04:46
चला दी लंका। [हंसी]
1:04:54
चूड़ामणि
1:04:57
लक्ष्मण
1:04:59
सीता की चूड़ामणि
1:05:02
कैसी है मेरी सीता
1:05:03
देवी सीता सकुशल है और रात दिन आपके आने
1:05:07
की राह देखती है महाराज तनिक भी विलंब ना
1:05:11
करें अन्यथा दो माह बाद रावण सीता माता को
1:05:15
मार देगा
1:05:16
जय श्री राम जय श्री राम
1:05:23
मित्रों
1:05:25
मैं प्रसन्न हूं कि आप लोग मेरे लिए
1:05:27
एकत्रित हुए
1:05:30
लेकिन मेरी सहायता करने में आपके मार्ग
1:05:33
में अनेक कठिनाइयां आ सकती हैं। मैं तो
1:05:37
स्वाभिमान के लिए लड़ रहा हूं। मगर आप
1:05:40
बाध्य नहीं हैं।
1:05:42
देवी सीता की खोज में आपका सामना
1:05:46
महाबलशाली रावण और उसकी सेना से होगा।
1:05:51
जिसको युद्ध में नहीं जाना हो वो स्वतंत्र
1:05:54
है। लेकिन मैं दशरथ पुत्र रघुवंशी राम
1:05:58
आपको विश्वास दिलाता हूं कि विजय हमारी
1:06:02
होगी।
1:06:04
अत्याचारी राक्षसों को हम पृथ्वी से मिटा
1:06:08
देंगे।
1:06:09
जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम।
1:06:17
अब कोई शक्ति मेरे रास्ते में नहीं आ
1:06:19
सकती। स्वयं समुद्र मुझे मार्ग देगा।
1:06:29
हे समुद्र अपनी विशालता पे अभिमान है तुझे
1:06:37
तू मुझे रास्ता नहीं देगा
1:06:40
मैं तेरा अपमान चूर कर दूंगा मैं तुझे
1:06:44
सुखा दूंगा
1:06:48
जय श्री राम
1:06:51
जय श्री राम
1:06:54
सारे सेनापति ियों की आपत बैठक बुलाओ। अभी
1:06:58
जहांजहां सेना है वहां से तत्काल वापस
1:07:01
बुला लो। राक्षसों की परीक्षा है।
1:07:06
हे ईश्वर मेरे स्वामी की सहायता करना।
1:07:32
रावण की सेना में सबसे शक्तिशाली है
1:07:34
मेघनाथ।
1:07:37
कुंभकरण तो सोया हुआ है लेकिन उसका भी कोई
1:07:40
तोड़ नहीं।
1:07:43
उसका दूसरा पुत्र प्रहस्त महासेनापति है।
1:07:46
[चीखने की आवाज़] मणिभद्र युद्ध से
1:07:48
प्रसिद्ध हुआ है वो रावण के पास एक से
1:07:51
बढ़कर एक महारथी है श्री राम।
1:07:55
उसके पास धर्म की शक्ति नहीं है
1:07:58
उसका दंभ और अनाचार ही उसका नाश करेगा।
1:08:03
मैं आपके पास प्रभु श्री राम का संदेश
1:08:05
लाया हूं कि अभी भी समय है। माता सीता को
1:08:09
वापस कर दो।
1:08:10
तेरा पिता मेरा मित्र था। अंगद मेरे साथ
1:08:14
आजा। तू किष्कंधा का राजा बन सकता है।
1:08:20
[हंसी]
1:08:22
मुझे अपने परिजन आपसे अधिक प्यारे हैं।
1:08:24
राक्षस राज समय नष्ट ना करें। सीता माता
1:08:28
को लौटा दे। तू जा और बोल अपने राम से कि
1:08:33
वो रावण के सामने अभी बच्चा है।
1:08:39
जंगल के कुछ पशु इकट्ठे करके वो मुझसे
1:08:45
[हंसी]
1:08:49
मुझसे युद्ध करने चला है।
1:08:53
अपनी शक्ति पे इतना घमंड है रावण। यदि इस
1:08:57
सभा का कोई भी वीर मेरा पैर उठाकर दिखाए
1:09:01
तो जानू।
1:09:41
मेरे पैर क्या पकड़ता है रावण जाके श्री
1:09:45
राम के चरण पकड़ तुझे जीवन दान वही देंगे
1:09:49
जय श्री राम
1:09:52
जय श्री राम
1:10:00
श्री राम
1:10:02
दंभी रावण युद्ध ही चाहता है
1:10:08
[चीखने की आवाज़]
1:10:08
हो
1:10:13
[चीखने की आवाज़]
1:10:29
एक भिखारी
1:10:32
जंगल के पशुओं को इकट्ठा कर रावण को
1:10:36
चुनौती दे रहा है।
1:10:40
हम उसको वो सबक सिखाएंगे कि भविष्य में
1:10:44
कोई भी, कोई भी लंका की ओर आंख उठाकर
1:10:49
देखने से भी डरे हम
1:10:53
हैं।
1:11:22
जय श्री राम जय श्री राम [चीखने की आवाज़]
1:11:41
ओ
1:11:45
[चीखने की आवाज़]
1:12:58
श्री राम यह प्रहस्त की सेना है। रावण की
1:13:02
सेना का एक तिहाई भाग इसे पराजित किया तो
1:13:05
रावण की शक्ति बहुत कम रह जाएगी।
1:13:20
[कराहने की आवाज़][चीखने की आवाज़]
1:13:42
ये
1:13:45
ये [चीखने की आवाज़]
1:13:48
हो
1:13:50
[कराहने की आवाज़]
1:13:50
या
1:13:57
[कराहने की आवाज़][चीखने की आवाज़]
1:14:06
[कराहने की आवाज़]
1:14:08
[चीखने की आवाज़]
1:14:11
हे
1:14:42
स्वामी ये राम बड़ा ही शक्तिशाली है। उस
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पर यह वानर
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आप सीता को लौटा दीजिए ना।
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ये वैभव
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ये संपन्नता
1:15:07
ये जो सोने की लंका देख रही हो ना रानी
1:15:11
यह सब मेरा है।
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स्वयं के बाहुबल से अर्जित किया है मैंने
1:15:20
सीता।
1:15:23
सीता अब मेरा आत्मसम्मान है
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और रावण
1:15:31
अपना आत्मसम्मान
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किसी को नहीं दे सकता समझी मंदोदरी
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किसी को भी नहीं
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क्या हुआ मित्र कोई विशेष सूचना मेरे
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गुप्तचरों ने सूचना दी है कि कल युद्ध में
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रावण की योजना कुंभकरण को भेजने की
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मुझे वक्त चाहिए राम का। कहां है राम? हा
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राम
1:17:09
ऊ
1:17:47
नहीं नहीं
1:17:49
ये नहीं हो सकता मेरे होते हुए तुम मृत्यु
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की ओर नहीं जा सकते। लक्ष्मण
1:17:55
सुमित्रा मां को क्या मुंह दिखाऊंगा?
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बहुत हल्का स्पंदन है। परंतु अभी भी आशा
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है।
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हिमालय पर्वत में एक बूटी पाई जाती है
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आर्य मृत संजीवनी। लेकिन समय हमारे पास
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सूर्योदय तक ही है।
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कौन जाएगा वायुपुत्र? मैं जाता हूं
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वृक्षराज।
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श्री राम
1:18:18
श्री राम जय श्री राम
1:18:23
राम
1:18:25
राम
1:18:27
राम जय श्री राम
1:18:36
सुशेन महाराज
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मैं भला भूटी क्या पहचान ये रहा द्रोणाचल
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धन्य हो हनुमान मान धन्य हो
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[नाक से की जाने वाली आवाज़]
1:19:01
हम्म
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[हंसी]
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फिर जाता हूं। इस बार पहले हनुमान को ही
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मारूंगा।
1:19:21
रुको पुत्र।
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ये शत्रु
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प्रबल है। हमें कोई और युक्ति सोचनी होगी।
1:19:44
इसी के लिए तुम लोग युद्ध कर रहे हो ना?
1:19:49
ये लो।
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[हंसी]
1:20:03
सीता
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[चीखने की आवाज़]
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ये ये असंभव है। यह अवश्य ही रावण की माया
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होगी। मैं अभी पता लगाता हूं।
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मैंने तुम्हें
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1 वर्ष का समय दिया था प्रिय। अब केवल
1:20:26
चार दिन शेष है। यही स्मरण कराने आया था।
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अरे हां
1:20:35
ये लो।
1:20:37
ये लो तुम्हारा राम।
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अब चार दिन बाद ही आऊंगा सीते।
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सूचनाएं थोड़ी अस्पष्ट है बंधु। प्रिजटा
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से मेरा गुप्तचर अभी नहीं मिल पाया है।
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अर्थात भाभी जीवित हो सकती है। हां, एक
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बात और मेघनाथ तांत्रिक निकुंभला यज्ञ
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करने गया है। निकुंभला
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यदि यह यज्ञ पूरा हुआ तो उसे ऐसा रथ
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मिलेगा जिस पे चढ़कर युद्ध करने वाला
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व्यक्ति अभिजीत और अमर रहता है। मैं जानता
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हूं कहां कर रहा है यज्ञ मेघनाथ।
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माता बताओ मैं प्राण त्यागना चाहती हूं।
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पुत्री तुम्हारे पति अजय हैं। राक्षस राज
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ने अवश्य ही कोई माया रची होगी। मैं पता
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लगाती हूं। विभीषण के गुप्तचर को जानती
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हूं मैं।
1:22:15
[कराहने की आवाज़]
1:22:42
महाराज राम को पता चल गया कि सीता जीवित
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है। विभीषण ने भेद खोल दिया है।
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रावण
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इस तरह धैर्य छोड़ना तेरा स्वभाव नहीं है।
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तूने इन नौ ग्रहों पर विजय पाई है रावण।
1:23:02
तू स्वयं भी समर्थशाली है। तू महाबलशाली
1:23:06
है। तू त्रिलोक विजेता है। तू राम है।
1:23:12
[चीखने की आवाज़] रावण
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मैं पराजित नहीं हो सकता।
1:23:22
मैं
1:23:23
रावण हूं। रावण
1:23:27
राक्षस राज रावण
1:23:34
[संगीत]
1:24:02
ओम
1:24:23
मूर्ख वानरो
1:24:25
मैं तुम्हें मच्छर की तरह मसल दूंगा।
1:24:29
[कराहने की आवाज़][चीखने की आवाज़]
1:24:41
[चीखने की आवाज़]
1:24:42
[हंसी]
1:24:49
सम्रमरी
1:24:55
विराजमान
1:24:59
[हंसी]
1:25:00
ललाट पावशोर
1:25:03
चंद्र के
1:25:06
क्षणम मम
1:25:31
या
1:25:57
आ [चीखने की आवाज़]
1:26:11
हां
1:26:39
मुझे कोई नहीं मार सकता।
1:26:42
इसे ब्रह्मा का वरदान मिला है। श्री राम।
1:26:45
मैं अमर हूं।
1:26:47
इसकी नाभि में अमृत है।
1:26:49
राम तेरी मृत्यु मेरे हाथों से लिखी है।
1:26:59
[हंसी]
1:27:00
चारों पैरों पर हनुमान
1:27:03
गाय
1:27:23
[कराहने की आवाज़][चीखने की आवाज़]
1:27:25
राम श्री राम श्री राम जय श्री राम
1:27:32
राम श्री राम श्री [संगीत] राम जय श्री
1:27:37
राम
1:27:39
राम श्री राम श्री राम जय जय श्री राम
1:28:01
[कराहने की आवाज़][चीखने की आवाज़]
1:28:21
आ
1:28:41
जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय
1:28:47
श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री
1:28:52
राम
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दुष्ट रावण मारा गया सब भाग गए त्रिजटा भी
1:28:59
मेरे राम विजय हुए
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स्वामी आ रहे होंगे मुझे लेने
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कैसे सामना करूंगी उनका एक वर्ष हो गया
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उनसे पिछड़े
1:29:13
[हंसी]
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मैं क्या नई बहू जो मुझे इतनी लज्जा रही
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है
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सीते
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आंखें खोलो सीते मैं आ गया तुम्हारा राम
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कहीं ये स्वप्न तो नहीं
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नहीं
1:29:34
आंख खोलूंगी तो टूट जाएगा।
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ये स्वप्न नहीं है सीता।
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हम विजय हुए।
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मुझे क्षमा कर दीजिए भाभी।
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मैं आपकी रक्षा ना कर सका।
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ऐसा मत बोलो लक्ष्मण। यही नियति थी।
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तुम्हारा कोई दोष नहीं। चलो अब घर चलते
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हैं। 14 वर्ष बीत गए। अयोध्या में सब
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प्रतीक्षा कर रहे होंगे। महादेवी सीता की
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जय हो।
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प्रभु श्री राम की
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जय हो।
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जय हो। जय श्री राम।
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जय
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जय राम। जय श्री राम
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जय श्री
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जय
1:30:27
जय श्री राम [हौसला बढ़ाने की आवाज़]
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जय
1:30:32
जय
1:30:34
जय श्री राम
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दीदी
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चक्रवर्ती राजा बनु पुत्र
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ओम
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ओम ओम
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